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वैशाली डायरी

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परिचय

परम्पराओं और संस्कारों से अपने जीवन को सुशोभित कर प्रो. संजय कुमार सिंह ने अपने जीवन को हमेशा सामान्य बनाकर रखा हैं। अपने जीवन में सदैव सादगी भरे जीवन जीने में अपने उपर एक बैरियर खुद में लगा पाना बहुत मुश्किल होता हैं, पर प्रो. संजय कुमार सिंह ने स्वयं पर लागू किया। प्रो. संजय कुमार सिंह इन्हीं पूँजी को लेकर अपना कदम बढ़ा रहे हैं। जीवन को परम्पराओं की पूँजी से सींचते हैं। प्रो. संजय कुमार सिंह एक परम्परागत, संस्कारों, परिवारों की पूँजी को संकलित कर समाज निर्माण का कार्य करते हैं। प्रो. संजय कुमार सिंह का कहना हैं कि उपर्युक्त सभी पूँजीओं के आधार पर हम प्रयास कर रहे हैं कि हम राज्य एवं राष्ट्र के विकास में योगदान करें। समाज या राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है - शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, पानी, रोजगार आदि में कदम-दर-कदम बढ़ा रहें हैं। परम्पराओं की पूँजी से संस्कार निर्माण।

संस्कारों की पूँजी से परिवार निर्माण।।
परिवारों की पूँजी से समाज निर्माण।
समाज की पूँजी से राष्ट्र निर्माण।।

प्रो. संजय कुमार सिंह ने अपने जीवन में एक सामान्य बनकर आगे बढ़ते हुए, एक प्रयास किया कि जिससे समाज को बेहतर बना सके। आर्थिक-मजबूती के लिए ही अनेकों व्यापार खड़े करने में संपूर्ण जीवन का संघर्ष लगाकर तैयार किया। जैसे - कृषि क्षेत्र, शैक्षिणिक क्षेत्र, कौशल विकास, कम्प्यूटर शिक्षा को प्रमुखता से करने का प्रयास किया। प्रो. संजय कुमार सिंह ने अपने जीवन में अपने गाँव में ही स्थापित काॅलेज - निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली को एक नया आयाम दिया। वहीं खुद उसके छात्र होने के बाद आज उसी काॅलेज में प्रो. हैं और काॅलेज के विकास को लेकर वैशाली ही नहीं बिहार स्तरों पर अपने काॅलेज - निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली को स्थापित किया।

परिवार :

स्वयं में एक परिवार को जीवंत करने वाले प्रो. संजय कुमार सिंह ने अपने ईद-गिर्द के सभी के लिए हमेशा परिवारिक ही बनाये रखे आगे बढ़़ते हैं। प्रो. संजय कुमार सिंह का मानना हैं कि राष्ट्र का विकास का एक मात्र माध्यम शिक्षा हैं। शिक्षा एक ऐसी पूँजी है कि मानवता को जन्म देती है। एक मानव का बुद्धि का विकास शिक्षा के माध्यम से ही किया जा सकता है। शिक्षा मानवीय मूल्यों का आधार है जिससे हम परम्पराओं की नींव रखते है। परम्पराओं की नींव ही पारिवारिक पूँजी की कुँजी है, जिसे हम खानदानी परिवार कहते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति ही बहुत बेहतर तरीके से संस्कारित, समाज को मजबूती और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित हो सकता हैं और समर्पण कर सकता हैं।

मातृभूमि अपने मातृभूमि को लेकर प्रो. संजय कुमार सिंह की सोच़ इसी से पता चलता हैं कि उन्होंने अपने जीवन के सबसे बड़े मानवीय मूल्यों के लिए शिक्षा के आधार को अपने गाँव ही मजबूती की।






शिक्षा :-

प्राथमिक शिक्षा :
आदर्श मध्य विद्यालय, सिंघाड़ा

उच्च शिक्षा (10वीं) :
उच्च विद्यालय, सिंघाड़ा, 1986

इंटर - कला :
निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली, 1988

स्नातक :
इतिहास राज नारायण महाविद्यालय, हाजीपुर, वैशाली, 1991

स्न्नातकोत्तर :
लंगट सिंह, काॅलेज, मुजफफ्रपुर, बिहार, 1993

डाॅक्टर आॅफ फिलाॅसफी :
बिहार विश्वविद्यालय, मुजफफ्रपुर, बिहार, 19..(प्राचीन भारत में आर्थिक उन्नति - शोध पत्र प्रकाशित)

नोट: संबंधता प्राप्त निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली।



संघर्ष :-

2001-03 :
जीवन में पहले कदम के रूप व्यवसायिक जीवन की शुरूआत एक काॅन्ट्रेक्टर के रूप से किया। वह एक पहली और शुरूआती कदम थे और अनुभवों की कमी से सीखने की गति आगे बढ़ाते हुए हाजीपुर के सीपेट में एक कमरे और बीएसएनएल के गोदम के साथ लगभग वहीं विश्राम लग गया।

2003-07 :
बचपन के साथी अरविंद झा, जो कि सिंघाड़ा के ही निवासी के साथ दुसरा कदम बढ़ाया। वहीं उनके साथ पंप-सेट, जेन-सेट का व्यवसाय की शुरूआत की और एक दूसरे सफ़र पर निकल गया।
( नोट:- दूसरे सफ़र में सहयोगी की भूमिका में भारत सरकार का प्राजेक्ट डैज्च् ; डनसजप ैमसस ज्नइमूमसस च्तवरमबजद्ध के माध्यम से किसानों के बीच पहुँचने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।)

2007 :
लगन और मेहनत का परिणाम पहली बार, सबसे महत्वपूर्ण जीवन में परिवर्तन का रास्ता तब बनकर आया, जब महिन्द्र टैªक्टर का डिलरशीप का आॅफर चल कर खुद मिला। दिनांक 28 मार्च 2007 को जिला के क्षेत्रफल में छोटा रहने के बावजूद भी बिहार के टाॅप - 5 में हमेशा से स्थान बनाये हुए हैं। स्थापना काल से ही वैशाली जिला में वैशाली कृषि केन्द्र प्रथम स्थान पर ही रहा है।

महत्वपूर्ण नोट :-

प्रो. संजय कुमार सिंह कहते हैं कि आलोक कुमार सिंह मेरे व्यवसायी साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि एक बड़े भाई के रूप में अभिभावक की तरह हमेशा साथ रहे हैं। व्यापार के नये बुलंदियों पर पहुँचने में आलोक भईयाँ का सहयोग हमेशा उत्साहवर्धक रहा है।

व्याख्याता :-

निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली, जिसमें शिक्षा का अवसर प्राप्त हुआ और उस काॅलेज को एक नया आयाम देने का अवसर मिला।



शिक्षण संस्थान :-

शिक्षण संस्थान
निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली को अपने पिता जी के साथ मिलकर काॅलेज को एक नया आयाम दिया हैं। आज निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली ने अपना एक बड़ा आयाम स्थापित कर दिया हैं। आज निरसू नारायण महाविद्यालय, सिंघाड़ा, महुआ, वैशाली, संपूर्ण बिहार का नं0 1 काॅलेज बन चुका हैं। यह एक आयाम तक पहुँचने में प्रो. संजय कुमार सिंह का अथक मेहनत का परिणाम हैं।

सामाजिक उत्थान :
एक समाजिक संस्थान का सदस्य बना, जो कि जन विकास समिति, सिंघाड़ा के सदस्य 1995 में बना और निरंतर संस्थान को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। वहीं अब जन विकास समिति का सचिव बनकर वर्ष 20018 से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।



कार्यकलाप :-

होटल व्यवसाय :
वर्ष 2018 के अंत तक होटल व्यवसाय में भी पर्दापन करने के साथ एक नई उंचाई की तरफ आगे बढ़ने चले गए। दिग्घी में महुआ-मुजफफ्रपुर के मोड़ पर स्थित किया हैं। वैशाली जिले में एक नया आयाम बनाकर आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं उत्तर बिहार के मुख्यमार्ग पर इतना सशक्त और सुंदर होटल की स्थापना कर एक नया आयाम स्थापित कर दिया।

कृषि सफ़र :
वैशाली कृषि केन्द्र, वैशाली की स्थापना श्री आलोक कुमार सिंह के साथ मिलकर किया। कृषि क्षेत्र में यंत्रों के साथ वैशाली के किसानों के लिए समुचित उपकरणों की उपयोगिता को बल दिया। आज वैशाली कृषि केन्द्र, वैशाली ने अपने टैªक्टर क्षेत्र में किसानों के लिए वरदान बनकर एक साथी के समान खड़ा है।

किसान व कृषि सफ़र :
वैशाली कृषि केन्द्र, वैशली की स्थापना दिवस के साथ ही एक परिवार बनाने का काम शुरू किया। जिसका एक बड़ा अभियान चलता रहा और प्रो. संजय कुमार सिंह की मेहनत का परिणाम हैं कि आज लगभग 14 वर्षों के सफर के बाद लगभग 25,000 परिवारों के साथ सीधा और पारिवारिक संबंध स्थापित किया।

रोजगार जहाँ सरकारों ने सिर्फ वादों की लंबी फेरीहत बनाई हैं तो वहीं अपने पिता के कर्मठता और परिवारों के संस्कृति, संस्कारों से एक बड़ा परिवार बनाने का बहुत बड़ा आयाम खड़ा किया। प्रो. संजय कुमार सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों में जोड़कर लगभग सैंकड़ों परिवारों को जीवन-यापन के अवसर उपलब्ध कराई। एक नया आयाम और सुरक्षित समाज बनाने का काम करने को जीवन को बहुत खुबसूरत बनाया। सैंकड़ो परिवारों के साथ एक पारिवारिक रिश्ते बनाना और उसे निभाना कोई भी प्रो. संजय कुमार सिंह से सीख सकते हैं।






सामाजिक सोच़ :-

एक पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करना ही जीवन का मूल मंत्र हैं।



राजनीतिक सोच़ :-

एक स्वच्छ राजनीतिक सफर को तय कर अपने दायित्वों का निर्वहन करना उद्देश्य हैं। जो अपने विचार शब्दों के माध्यम से लोगों तक पहुँचते हैं, उसके अनुसार अपनी जिम्मेदारियों को निभाना।



राजनीतिक सफ़र :-

जब भारतीय जनता पार्टी की नींव मजबूत हो रही थी, तब से अपने जीवन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजनीतिक सफर में कदम बढ़ा दिया। लगभग तीन दशकों से विभिन्न प्रकार से भारतीय जनता पार्टी के लिए एक कार्यकर्ता के रूप में काम करता रहा हूँ। भारतीय जनता पार्टी ने विभिन्न राज्यों के चुनावों में भी उन्हें प्रचार प्रसार करने का अवसर वहाँ के चुनाव प्रभारी बनाकर प्रदान किया। भारतीय जनता पार्टी के संगठानात्मक महत्वपूर्ण पदों पर भी लगातार काम कर रहे हैं।

2007 :
पहला राजनीतिक सफर जनता दल (यू), 2007 की सदस्यता से शुरू किया।

2008 :
पहली बार, वैशाली, जनता दल (यू): किसान प्रकोष्ठ: महासचिव

2010 :
दूसरी बार, वैशाली, जनता दल (यू): किसान प्रकोष्ठ: उपाध्यक्ष

2012 :
तीसरी बार, वैशाली, जनता दल (यू): मुख्य टीम: महासचिव

2014 :
चैथी बार, वैशाली, जनता दल (यू): मुख्य टीम: उपाध्यक्ष
दूसरा राजनीतिक सफर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक सदस्य के साथ वैशाली जिलाध्यक्ष बने।

20 सूत्री का सदस्य - 2014 :
तीसरा राजनीतिक सफर में उपलब्धी के रूप में वैशाली जिला के 20 सूत्री का सदस्य - 2014 में बना और अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।





जीवन उद्देश्य :-

मानवीय मूल्यों के साथ सामाजिक और राष्ट्रवादी जीवन के रूप में अपना योगदान देना ही मूल मंत्र है।

GALLERY :





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